जिंदा लाश Zinda Lash by Ramu Kavi Kisan

नीशू भाई का सैड स्टेटस देखा तो मेरा कवि मन जाग उठा

हालांकि मैं समझता हूं कि सटेटस से किसी का करैक्टर डिसाइड नहीं किया जा सकता यह मूड पर डिपेंड करता है तो मेरा भी मूड बन गया लिखने का और मैंने लिख डाले यह कुछ पंक्तियां



किसने बना दिया जिंदा लाश तुझे 

किसकी याद में मर रहे हो तुम 

ऐसे क्यों गुजर रहे हो तुम

Zinda Las


युवा हो तुम यह उम्र है आशा और उम्मीदों की

यदि और कुछ ना बन सके तो करो यादें उन शहीदों की

जिन्होंने हमें यह आजादी दिलाई

क्या इसी बात के लिए सैड मूड तन्हाई

आज तो हम आजाद हैं कहीं भी आ जा सकते हैं 

कुछ भी पहन और खा सकते हैं 

मगर पता नहीं आज के युवाओं को किस चीज की तलाश है 

बोलते हैं कि हम तो जिंदा लाश हैं


क्या देखा नहीं कभी वह तोड़ती पत्थर 

कितना बौझा उठा रखी थी सर पर 

फिर भी वह खुश है भरपेट खाना तक नहीं नसीब

फिर भी वह जी रही है एक जिंदा दिल इंसान की तरह, हबीब

जिंदा लाश की तरह नहीं, ना ही समझती रामू वो खुद को बदनसीब


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