जिंदा लाश Zinda Lash by Ramu Kavi Kisan
नीशू भाई का सैड स्टेटस देखा तो मेरा कवि मन जाग उठा
हालांकि मैं समझता हूं कि सटेटस से किसी का करैक्टर डिसाइड नहीं किया जा सकता यह मूड पर डिपेंड करता है तो मेरा भी मूड बन गया लिखने का और मैंने लिख डाले यह कुछ पंक्तियां
किसने बना दिया जिंदा लाश तुझे
किसकी याद में मर रहे हो तुम
ऐसे क्यों गुजर रहे हो तुम
![]() |
| Zinda Las |
युवा हो तुम यह उम्र है आशा और उम्मीदों की
यदि और कुछ ना बन सके तो करो यादें उन शहीदों की
जिन्होंने हमें यह आजादी दिलाई
क्या इसी बात के लिए सैड मूड तन्हाई
आज तो हम आजाद हैं कहीं भी आ जा सकते हैं
कुछ भी पहन और खा सकते हैं
मगर पता नहीं आज के युवाओं को किस चीज की तलाश है
बोलते हैं कि हम तो जिंदा लाश हैं
क्या देखा नहीं कभी वह तोड़ती पत्थर
कितना बौझा उठा रखी थी सर पर
फिर भी वह खुश है भरपेट खाना तक नहीं नसीब
फिर भी वह जी रही है एक जिंदा दिल इंसान की तरह, हबीब
जिंदा लाश की तरह नहीं, ना ही समझती रामू वो खुद को बदनसीब
..
....
......
..
.
.
.

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें